1973 के प्रारंभ में ही से कच्चे तेल तथा पेट्रोलियम उत्पादों के अन्तर्राष्ट्रीय मूल्यों की आनुक्रमिक तथा तीव्र वृद्घि के कारण पेट्रोलियम तथा पेट्रोलियम आधारित औद्योगिक कच्चे माल में प्रगामी आत्मनिर्भरता की आवश्यकता के महत्व को अनुभव कर तेल उद्योग (विकास) अधिनियम 1974 बनाया गया| तेल उद्योग (विकास) बिल 1974 के उद्देश्यों और कारणों के विवरण में निम्नलिखित उद्देश्य सम्मिलित किए गए|
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पेट्रोलियम तथा पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल में आत्मनिर्भरता की प्राप्ति के लिए बनाए गए से कार्यक्रमों की गति में तीव्रता लाना|
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ऐसे कार्यक्रमों के निश्पादन के लिए आवश्यक संसाधनों की निश्चितता|
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तेल उद्योग (विकास) निधि बनाने के उद्देश्य को पूरा करने के लिए कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस पर उपकर लगाना|
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इस निधि से केवल उन्हीं संरचनाओं को वित्तीय सहायता दी जाएगी जो तेल उद्योग के विकास कार्यक्रमों में कार्यरत हैं|
तेल उद्योग (विकास) अधिनियम की उद्देशिका में स्पश्ट रूप से इंगित है कि अधिनियम का उद्देश्य तेल उद्योग के विकास तथा उससे संबंधित मामलों के लिए एक बोर्ड का गठन करना है और इस काम के लिए कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस पर उत्पाद कर लगाना है|
बोर्ड शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला पूर्वोक्त नाम का एक निगमित निकाय होगा, जिसके पास स्थावर और जंगम दोनो प्रकार की सम्पति के अर्जन, धारण और व्ययन करने की और संविदा का अधिकार होगा और उक्त नाम से वह व्यवहार करेगा और उससे व्यवहार किया जाएगा|